जिम्मेदारी मिले तो पूरी ईमानदारी से निभाए

Jeene ki raah

अच्छा रसोइया हमेशा दूसरों के स्वाद को ध्यान में रखकर रसोई तैयार करता है। ऐसा ही हमारी ज़िंदगी में कई काम, कई फैसलों को लेकर होता है। काम करने वाले आप हैं, लेकिन ध्यान इस बात का भी रखना है कि उसके परिणाम से और भी लोग प्रभावित होंगे, आपके कृत्य में अनेक लोगों का स्वाद जुड़ा होगा। खास तौर पर जब आपको कोई जिम्मेदारी दी जाए तो पीछे मत हटिएगा। उस जिम्मेदारी को अवसर मानकर लपक लीजिए। इस मामले में पूरे ही उदार बन जाएं। दो फायदेे हैं इसके- एक तो इस तरह से आप दूसरों की सेवा कर रहे होते हैं और दूसरा यह कि आपको एक अनुभव मिल रहा होता है। अनुभव बैठे-ठाले जीवन में नहीं आएंगे। इसके लिए अपने दायरे से कुछ बाहर निकलना होगा। एक बात और, जब भी कोई जिम्मेदारी मिले, उसे पूरी ईमानदारी से निभाएं। जैसे कि रसोइया रसोई बनाते समय जानता है कि मेरी सारी कला इस बात पर टिकी है कि भोजन के बाद लोग स्वाद की चर्चा करें। बहुत अच्छा रसोइया हो तो स्वाद से आगे ले जाकर भोजन को तृप्ति में बदल देता है। खाने-पीने वाले कहते हैं स्वाद तो आया, पर तृप्ति भी मिल गई। तृप्ति के बाद फिर वह भोजन स्मृति में टिकना चाहिए। हम भी रसोइए की तरह अपनी हर जिम्मेदारी इस तरह से निभाएं कि जिसने सौंपी है, वह भी खुश हो और जिनके प्रति निभा रहे हैं उनको भी लगे जब-जब इनके हाथ में कोई काम आता है, उसका परिणाम बड़ा निराला होता है। यही आपकी सफलता है।


पं. विजयशंकर मेहता द्वारा रचित निम्नलिखित पुस्तकों से भी आप जीवन की किसी भी समस्याओं का समाधान का निदान कर सकतें है:

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