जो भीड़ में शांति और खुशी खोज ले, वही सच्चा भक्त

मंत्र, सांस व मन के जरिये दुर्गुणों से बचें

क्या आप भीड़ में भी शांति और खुशी तलाश सकते हैं? यदि हां, तो समझो आप सच्चे भक्त हैं। पिछले दिनों शिवरात्रि पर पूरे देश में धूमधाम से भगवान भोलेनाथ को याद किया गया। शोर मचा, ट्रैफिक जाम हुआ, बड़े मंदिरों में व्यवस्था-अव्यवस्था के नाम पर खूब हल्ला हुआ। शिवजी इतने पूजे गए कि वे हैं क्या, लोग यही भूल गए। देखिए, संसार अंधा है, क्योंकि वह ठीक से देख नहीं पाता। यदि देखता है तो सिर्फ देह, वस्त्र और ओहदा। आप क्या हैं, यह दुनिया कभी जान ही नहीं पाएगी। वह आपका आकलन देह, वस्त्र और ओहदे से कर लेगी, लेकिन कम से कम स्वयं तो जानें कि आप हैं क्या? जो वस्त्र पहने हैं, जो शरीर है, जो पद-प्रतिष्ठा है, उसका वास्तविक अर्थ समझना हो तो शिवचरित से गुजरना होगा। शिवरात्रि पर कितने लोगों ने शंकरजी के चरित्र से यह बात समझी होगी, कह नहीं सकते। शिव यानी भीड़ में शांति, शिव का अर्थ है जो भी काम करो, उसमें कल्याण का भाव हो, मिले या न मिले संतोष बना रहे। शंकरजी का अर्थ है ऐसा दांपत्य जिसमें सारी उलझनें हों, पर शांति भंग न हो। लेकिन, आजकल हमारे यहां उत्सवों के साथ प्रदर्शन का ऐसा घालमेल हुआ है कि कोई भी उत्सव क्या कह रहा है, उसके पीछे क्या संदेश है, कोई जानने को तैयार नहीं। भोलेनाथ को याद करने का अर्थ ही है जीवन में भोलापन बचाकर रखना। जो भोला है, वह भीड़ में भी शांत है और जो शांत है, वो ही खुश रह सकेगा..।

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