ज्ञान का उदय होने से दूर हो जाते हैं संदेह

ज्ञान का उदय होने से दूर हो जाते हैं संदेह

माया यानी जादू। इसे अंधकार भी कहते हैं। ज़िंदगी में माया आती है तो जो हमें सही दिखना चाहिए, वह दिखना बंद हो जाता है। फिर अंधेरे में दो घटनाएं घटती हैं- या तो कोई आपसे टकरा जाए या आप किसी से टकरा जाएंगे। कभी-कभी हम गलत निर्णय भी ले लेते हैं। लंका के युद्ध में शाम हो जाने पर जब वानर लौट आए और राक्षसों ने फिर हमला कर दिया तो उन्होंने ऐसी माया रची कि सारे बंदर परेशान हो गए। श्रीराम ने हनुमान और अंगद को कहा, ‘जाओ, वानरों का बल बढ़ाओ।’ पर रामजी समझ गए कि माया का जो अंधकार राक्षसों ने फैलाया है, वह केवल हनुमान और अंगद से नहीं हटेगा। तब उन्होंने धनुष उठाया और इस दृश्य पर तुलसीदासजी ने लिखा, ‘पुनि कृपाल हंसि चाप चढ़ावा। पावक सायक सपदि चलावा।। भयउ प्रकास कतहुॅ तम नाहीं। ग्यान उदयॅ जिमि संसय नाहीं।।’ रामजी ने हंसते हुए धनुष चढ़ाया और तुरंत ही अग्निबाण चला दिया, जिससे ऐसा प्रकाश हुआ कि कहीं अंधेरा नहीं रहा। ठीक वैसे जैसे ज्ञान के उदय होने पर सब संदेह दूर हो जाते हैं। ध्यान दीजिए, संदेह भी एक प्रकार का अंधकार है। जीवन में जब ऐसी स्थिति आ जाए कि आप संदेह में डूब जाएं, अंधकार-सा महसूस हो, भ्रम हो जाए तो परमात्मा से जरूर प्रार्थना करिए। परमशक्ति के रूप में वह कोई न कोई सोच का, विचार का या किसी गुरु का आगमन जीवन में कराएगा जो प्रकाश बनकर आएगा और यहीं से आपके सारे भ्रम, सारे अंधकार दूर हो जाएंगे..।

Facebook Comments

X