परिवार में प्रेमपूर्ण माहौल से अशांति मिटाएं

परिवार में प्रेमपूर्ण माहौल से अशांति मिटाएं

वर्षों पहले एक विदेशी लेखक ने हमारे देश के लिए टिप्पणी की थी कि भारत ऐसा अमीर देश है जहां गरीब लोग रहते हैं। उसकी बात आज एक अलग ढंग से देखी और समझी जा सकती है कि भारत वह शांत देश है जहां अशांत लोग बसते हैं। अब यहीं से यह बात शुरू होती है कि आज एक आम भारतीय का मन अशांत है। खास भी शांत नहीं है। और इसीलिए देश अशांत नज़र आ रहा है। जबकि भारत के पास धरती का जो खंड है, हमारी धरती के नीचे-ऊपर जो ऊर्जा है वह दुनिया में कम मिलेगी। यहां कुछ ऐसा घटा है, कुछ लोग ऐसे गुजरे हैं इस धरती से जिन्होंने अपने तेज, अपनी ऊर्जा से इसे लबालब कर रखा है। लेकिन, चूंकि हम भारतीय इस समय अपने उद्देश्यों में दोहरा जीवन जी रहे हैं, इसीलिए अशांत हैं। यहां अच्छा तैराक डूब जाता है, जनता द्वारा चुने हुए लोग जनता को ही धोखा दे जाते हैं, बुरी नीयत वाले साधु बन रहे हैं, लूट के इरादे रखने वाले नेता बन गए..। ये सारे लोग भीतर से अशांत हैं और इनकी निगेटिव एनर्जी से इनके संपर्क में आने वाले भी अशांत हो जाते हैं। कुल-मिलाकर ऐसा लगता है हमारा परिवार, हमारा नगर, हमारा समाज, हमारा राष्ट्र अशांत है, जबकि देश की धरती और परिवार के माहौल में आज भी शांति बसी हुई है। यदि आप कहीं चूक रहे हैं तो उसेे ठीक से अपने भीतर उतारने में। अब भी मौका है, अशांत मन के लोग देश की गरिमा और परिवार के प्रेमपूर्ण वातावरण से अपने भीतर की अशांति मिटा सकते हैं..।

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