विचारशून्य सांस लेने से आती है निर्भयता

विचारशून्य सांस लेने से आती है निर्भयता

जिन बातों से आप अंजान हैं उन्हें जानने का प्रयास जरूर करिए। खास तौर पर उन बिंदुओं को जो आपकी सफलता और असफलता की राह में आने वाले हैं या आ रहे हैं। तीन शब्द इन दिनों मनुष्य जीवन में बड़े जरूरी हैं- शांति, निर्भयता और सफलता। यदि आप शांति की तलाश में हैं तो सबसे पहले अशांति के कारण ढूंढ़ें। अपनी अशांति को ठीक से जानें और किन स्थितियों में अशांत हो जाते हैं, उन्हें तुरंत नोट कर लें। एक डायरी में तीन खाने रख लीजिए। अशांति का, भय का और असफलता का। जब भी अशांत हों, तुरंत लिखिए किस घटना से अशांत हुए। यदि निर्भय होना चाहते हैं तो भय के बिंदुओं (जिन-जिन कारणों से भय आता है) को नोट करें। इसी प्रकार पिछले साल जिन बातों में असफल रहे हों उन्हें भी नोट कर लें। फिर किसी दिन तसल्ली से बैठकर विचार करें कि इन तीनों स्थितियों में कितनी भूमिका आपकी और कितनी दूसरों की रही। दूसरों की भूमिका पर तो बहुत अधिक नियंत्रण नहीं पा सकेंगेे लेकिन, अपने आपको संभालिए। कोशिश कीजिए उन घटनाओं के दौरान आप व्यवस्थित और भीतर से पूरी तरह स्थिर रहें। इसके लिए योग का अभ्यास करना पड़ता है। योग कब घटता है? जब आती-जाती सांसें विचारशून्य हो जाती हैं। कुल-मिलाकर विचारशून्य सांस लेने का अभ्यास करें। परिणाम में पाएंगे इन तीनों पर आपकी पकड़ हो गई, आप उन स्थितियों को जान गए। फिर शांति, निर्भयता और सफलता बहुत जल्दी प्राप्त हो जाएगी।

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