सुखी गृहस्थी चाहते हैं तो शिकायत न करें

सुखी गृहस्थी चाहते हैं तो शिकायत न करें

हम लोग विवाह करके घर क्यों बसाते हैं? जीवन का यह एक बहुत बड़ा लक्ष्य होता है कि जो अब तक प्राप्त नहीं हुआ, उसे हासिल करें। विवाह ऐसा ही लक्ष्य है। इसमें शरीर और हृदय जो चाहते हैं, वह भी मिल जाता है। परिवार में वासना, प्रेम एक साथ चलते हैं। हालांकि, इन दोनों का छत्तीस का आंकड़ा है लेकिन, गृहस्थी में ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। बिना वासना के पारिवारिक संबंध पूरे नहीं हो सकते और बिना प्रेम के परिवार बचाया भी नहीं जा सकता। घर-परिवार के सारे रिश्ते अपेक्षा पर टिके होते हैं। हमें दूसरों से, दूसरों को हमसे उम्मीद होती है, इसीलिए तो घर बसाते हैं। गृहस्थी में एक-दूसरे से अपेक्षा हो इसमें कोई बुराई नहीं है। झंझट तब शुरू होती है, जब अपेक्षा शिकायत में बदल जाती है। अगर आप परिवार में शांति से रहना चाहते हैं, अपनी गृहस्थी को सुंदर और सुखी बनाना चाहते हैं तो एक बात हमेशा के लिए बाहर निकाल दीजिए और वह है शिकायत। रिश्ते में एक बार शिकायत आई तो निश्चित ही अपने साथ कलह को आएगी। तो गृहस्थी में अपेक्षा तो करें, पर पूरी न हो तो शिकायत भी न रखें। ऐसा मानकर चलिए जैसे भगवान भी जरूरत नहीं होती फिर भी बहुत सारे काम करते हैं। ऐसे ही हम भी भगवान की तरह गृहस्थी बसाएं। खूब अच्छे से एक-दूसरे से उम्मीद रखें, पर वह पूरी हो या न हो, शिकायत न करें। शिकायतचित्त गृहस्थी और परिवार के लिए जहर है। इससे बचें और अपनी गृहस्थी को वैकुंठ बनाएं..।

X