January 22, 2019
परिवार में सब सदस्यों को अपने जैसा मानें

परिवार में सब सदस्यों को अपने जैसा मानें

‘प्रेम गली अति सांकरी ता में दो न समाए…’। इस पंक्ति में कबीरदासजी ने ऐसा भाव व्यक्त किया है कि प्रेम की गली में दो लोग […]
January 19, 2019
दुनिया पाने के लिए दौड़ें तो गुरु साथ रखें

दुनिया पाने के लिए दौड़ें तो गुरु साथ रखें

दुनिया पाने के लिए जो लोग दौड़ रहे हैं, थकते वो भी हैं। फिर मन में एक विचार आता है कि लौट चलें या आगे बढ़ें? […]
January 18, 2019
समझदारी को विराम देना है निष्कामता

समझदारी को विराम देना है निष्कामता

क्या आप उतने समझदार हैं, जितना दूसरे आपको समझते हैं? इसमें भी दो बातें होंगी- एक तो यह कि दूसरे जानते नहीं होंगे कि जितना समझदार […]
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