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भारतीय संस्कृति के चार ग्रन्थ बड़े अद्भुत हैं – महाभारत रहना सिखाती है, गीता करना सिखाती है, भागवत मरना सिखाती है और श्रीराम कथा जीना सिखाती है. इस पुस्तक में श्रीराम कथा को इसी शैली में प्रस्तुत किया गया है. जीवन में कोई भी समस्या हो, निदान इस पुस्तक के हर पृष्ठ पर मिल जायेगा.

इस पुस्तक के अंतरगर्त आप निम्न्लिखित अध्याय का अध्यन कर सकेंगे:

१. बाल काण्ड – जीवन में हर कोई सुख चाहता है. बाल काण्ड की कथा वह सुख देती है, जो हमको भीतर तक शांत करता है. प्रेम के साथ जो इसे गाएँगे, सुनेंगे और पढ़ेंगे, यश और  मंगल के धाम श्रीराम उनके जीवन में उत्साह भरेंगे, सुख भरेंगे।


२. अयोध्या काण्ड – पुस्तक के इस अध्याय में भगवान श्रीराम का संघर्ष बताया गया है. यह भाग हमें बताता है की परिवार में से ही परिवार का कोई सदस्य बाहर कर दिया जाये और फिर भी वह परिवार बचा ले, उसका नाम है राम.


३. अरण्य काण्ड – इस भाग में शूर्पणखा वध, मारीच प्रसंग और रावण का सीता हरण के घटनाक्रम अरण्यकाण्ड में उल्लेखित हैं।


४. किष्किंधा काण्ड –  पुस्तक के इस अध्याय में हनुमान जी मिलन से बालि वध व सीता खोज की तैयारी तक के घटनाक्रम आते हैं।


५. सुन्दर काण्ड – संपूर्ण रामायण कथा श्रीराम के गुणों और उनके पुरुषार्थ को दर्शाती है किन्तु सुंदरकांड एकमात्र ऐसा अध्याय है, जो सिर्फ हनुमानजी की शक्ति और विजय का कांड है।


६. लंका काण्ड – रामायण के इस काण्ड  में पुल निर्माण से राम-रावण युद्ध व अयोध्या वापसी तक के घटनाक्रम आते हैं।


७. उत्तर काण्ड – उत्तरकाण्ड में रावण के पितामह, सीता का पूर्वजन्म, सीता का त्याग, सीता का वाल्मीकि आश्रम में आगमन का वर्णन किया गया है।

पेज संख्या: २२४

– पं. विजयशंकर मेहता (जीवन प्रबंधन गुरु)

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