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आमतौर पर हम सबसे पहले अपने व्यावसायिक जीवन, उसके बाद सामाजिक जीवन, फिर यदि समय मिले तो पारिवारिक और अंत में निजी जीवन की ओर ध्यान देते हैं.

पं. विजयशंकर मेहता, इस पुस्तक के माध्यम से हमें बताते हैं की जीवन प्रबंधन  को अध्यात्म से जोड़ने पर यह क्रम पलटा जा सकता है, जिससे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और शान्ति मिल सकती है.

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